गुरुवार, 28 मई 2009

एक पुरातत्ववेत्ता की डायरी-पहला दिन-चार


लेकिन हमारी कोशिश असफल रही। मैने कहा ‘चलो समय काटने के लिये मै तुम लोगों को बेताल की तरह एक कहानी सुनाता हूँ।“ रवीन्द्र बोला”मगर हम तो ज़िन्दा हैं यार” अशोक ने कहा “चुप बे.. ये जीना भी कोई जीना है लल्लू ” मैने मुस्कराकर अपना आख्यान शुरू कर दिया..”चलो मै तुम्हें यूनान ले चलता हूँ। योरोप और बाल्कन प्राय:द्वीप के दक्षिण में इजियन सागर सागर से लगा प्रदेश है यूनान। यहाँ दक्षिण यूनान के पेलोपोनेसस में उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में उत्खनन किया गया जहाँ माइसीनी नगर में सभ्यता का पता चला। पुरातात्विक सामग्री के अलावा यूनान के प्राचीन इतिहास के बारे में जानने का स्त्रोत वहाँ की पौराणिक कथायें भी हैं। यद्यपि इन कथाओं के नायक व घटनायें काल्पनिक हैं लेकिन इनमें प्राचीन यूनानियों के काम धन्धे ,औज़ारों,रीती-रिवाज़ों आदि के बारे में बहुत सारी जानकारियाँ मिलती हैं। वे किन देशों की यात्रायें करते थे और किन किन देवी-देवताओं में विश्वास करते थे यह जानकारी भी इनमें है।
“तू कहानी सुना रहा है या इतिहास?” अजय जोशी ने ऊबकर पूछा। “जानता नहीं कहानी और इतिहास में बहुत फर्क होता है ।“रवीन्द्र ने जवाब दिया। “जानता हूँ यार,चल आगे सुना “ अजय बोला। “चलो ठीक है अब तुम्हे हर्क्यूलिस की कहानी सुनाता हूँ ।“ मैने कहा “यूनानी लोग पराक्रमी हर्क्यूलिस के कारनामों को बहुत पसन्द करते थे। वहाँ एक राजा ऑजियस था उसकी गौशाला में पाँच हज़ार बैल थे। एक बार उसकी गौशाला गोबर से भर गई,उसे साफ करने वाला कोई ना था, तब हक्यूलिस ने पास की दो नदियों पर बान्ध बना दिया, जल्द ही नदियाँ ऊपर तक भर गईं और जो पानी की धार छूटी सारा गोबर बहा ले गई”
“तू भी यार सोते समय क्या गन्दी गन्दी कहानी सुना रहा है..तेरे दिमाग में भी लगता है यही भरा है” अजय ने हँसते हुए कहा ।“सुनो तो “ मैं अपने प्रवाह में था “एक बार यही हरक्यूलिस सोने के सेब की खोज में निकला ।वह यूनान से पश्चिम में इजियन महासागर के किनारे किसी बाग में था । अब उस समय यूनानियों को आकाश की वास्तविकता तो मालूम नहीं थी ।वे सोचते थे कि आकाश पृथ्वी पर गिर रहा था लेकिन वीर अटलांटिस ने उसे अपनी पीठ पर थाम लिया जिसकी वज़ह से पृथ्वी बच गई।
“इसी के नाम पर अटलांटिक महासागर का नाम है ना?” अशोक ने पूछा “ हाँ “मैने कहा “ हरक्यूलिस ने अटलांटिस से सेब तोड़ने के लिये कहा । जितनी देर में अटलांटिस ने सेब तोड़ा हरक्यूलिस ने आकाश को थामे रखा। यूनानी कहते हैं कि आकाश का वज़न इतना अधिक था कि हरक्यूलिस के पाँव घुटनों तक पृथ्वी में धंस गये ,बोझ से उसकी हड्डियाँ चरमराने लगीं और पसीने की नदियाँ बहने लगीं।“
“हाँ यार वीर तो सारे यूनान में ही हुए हैं,लेकिन हमारे वीर हनुमान भी उनसे कम नहीं” हर्क्यूलिस के भारतीय संस्करण .हमारे हनुमान भक्त मित्र पंडित राममिलन शर्मा इलाहाबादी ने अपनी टिप्पणी दी। मैने कहा”हाँ भाई,यूनानियों की तरह पुराणकथायें तो हमारे यहाँ भी हैं और उनमे भी अनेक किस्से हैं। लेकिन कुछ बातों का श्रेय तो यूनानियों को दिया जाना चाहिये जैसे ओलम्पिक। जिस मैराथन दौड को हम लोग जानते हैं वह भी वहीं शुरु हुई। पाँचवी शताब्दी ईसा पूर्व में यूनान पर पारसिक सम्राट डेरियस का हमला हुआ था। यूनानियों पर पारसिक हमले में स्पार्टा से सहायता माँगने एक वीर धावक फिडिपिटस मेराथन नामक स्थान से एक सौ बीस किलोमीटर दूर स्पार्टा गया ,फिर वापस लौटकर मैराथन आया,इस बीच यूनानी पारसीकों को हरा चुके थे।इस जीत का समाचार देने वह फिर मैराथन से बयालीस किलोमीटर दौड़कर एथेंस पहुंचा,वहाँ पहुंच कर उसने यूनानिओं की जीत का समाचार दिया और प्राण त्याग दिये।उसी वीर धावक के नाम पर यह मैराथन दौड़ होती है।“
“ वह तो ठीक है यार लेकिन तेरी बातें समझने के लिये प्राचीन विश्व का नक्शा लेकर बैठना पड़ेगा “ रवीन्द्र ने कहा। वैसे भी रात काफी हो चुकी थी और नींद से सबकी आंखे बोझिल हो चली थीं। पूस की ठंडी हवा तम्बू के छेदों से भीतर प्रवेश कर रही थी। मैं उस हवा में पृथ्वी के पहले मनुष्य की देहगन्ध महसूस करता हुआ जाने कब नींद के आगोश में चला गया।
आपका- शरद कोकास

4 टिप्‍पणियां:

  1. मेराथन के बारे में जानकर अच्छा लगा. ज्ञानवर्धन का आभार.

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  2. sharad bhai......kamaal andaaj hai ,,, aur shailee bhee dilchasp raha...aage bhee padhne kee ichha hai....

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  3. दूसरों को अपने चिट्ठे पर आकृष्ट करने के लिए उनके चिट्ठों पर जाकर टिपण्णी किया करें. हम तो आपको पढ़ ही रहे हैं. जवानी की नोक झोंक मन भावन लगी.

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