रविवार, 31 मई 2009

एक पुरातत्ववेत्ता की डायरी-दूसरा दिन -तीन



लेकिन सर जी वो हेलनवा का का हुआ?
नाश्ता करते हुए होमर के महाकाव्य ईलीयड और ओडीसी पर चर्चा होने लगी डॉ.आर्य बताने लगे..”ट्राय जिसे प्राचीन यूनानी में इलियोस या इलियोन भी कहते हैं,यूनान से पश्चिम में इजियन सागर के तट पर बसा एक शहर था अपने सेना नायकों के नेतृत्व में यूनान के कबीलों ने उस पर आक्रमण किया ट्राय एक पहाड़ी पर था और उसके चारों ओर पत्थर की दीवार थी यूनानी दस वर्ष तक ट्राय को घेरे रहेयूनानियों का प्रमुख योद्धा एकीलीज था जिसका युद्ध ट्राय के योद्धा हेक्टर से हुआ कहते है एकीलीज एडी मे तीर लगने से मरा ,उसकी माँ ने जो एक देवी थी बचपन में उसे एड़ी पकड़कर पवित्र स्टिक्स नदी में नहलाया था जिसके कारण एड़ी के अलावा उसका सारा शरीर कठोर बन गया था ” “अरे “ राममिलन ने कहा “ ऐसी ही कथा हमारे यहाँ दुर्योधन की भी तो है महाभारत में “ डॉ. आर्य ने अपनी कथा जारी रखी. “हो सकता है ,पौराणिक कथायें एक सभ्यता से दूसरी सभ्यता में आती जाती रहती हैं, आगे सुनो .. लेकिन जब यूनानी युद्ध में उन्हे नहीं हरा सके तो उन्होनें एक चाल चली उन्होनें लकड़ी का एक घोड़ा बनाया जिसमें यूनानी सैनिक छुप गये बाकी सभी वापस लौटने का दिखावा करते हुए पास के एक द्वीप पर चले गये घोड़ा उन्होनें नगर द्वार पर रख दिया रात में ट्रायवासी अपने आप को जीता हुआ मानकर घोड़ा नगर के भीतर ले आये मौका देखकर उसमें छुपे हुए सैनिक बाहर निकले ,उन्होने ट्राय के सारे पुरुषों को मार डाला और स्त्रियों को बन्दी बना लिया तथा पूरे नगर में आग लगा दी उसके बाद वे विजयोल्लास के साथ वापस लौट गये यह पूरी घटना नेत्रहीन कवि होमर ने अपने महाकाव्य ओडीसी में लिखी है ईलीयड में सेना के वापस लौटने का वर्णन है
अजय ने सवाल किया ” लेकिन ऐसा क्या सचमुच में घटित हुआ था? “ डॉ.आर्य ने बताया “होमर के महाकाव्य में पौराणिक कथायें व लोककथायें इतनी हैं कि बहुत समय तक लोग इन्हे काल्पनिक ही मानते रहे लेकिन पुरातत्ववेत्ताओं ने एशियाई कोचक में सागर तट के पास हिसारलिक नामक टीले की खुदाई की है वहाँ विभिन्न कालों की अनेक बस्तियों के साथ ट्राय के खन्डहर भी मिले हैं जिनके अनुसार इतिहासकारों ने ट्राय पर यूनानी हमले की तिथी कोई 1200 ई.पू. तय की है हाँलाकि पुरावेत्ताओं का काम अभी अंतिम निष्कर्ष पर नही पहुंचा है और इसमे अभी बहुत विवाद है
“लेकिन सर जी वो हेलनवा का का हुआ? राम मिलन इलाहाबादी ने सवाल किया“अरे यार ,तुम अभी हेलेन पर ही अटके हो,अरे उसी की वज़ह से तो यह युद्ध हुआ । ना उसका अपहरण होता ना यह युद्ध होता.। “ “मतलब हमारी सीता मैय्या जैसी ही कहानी है क्या?” राम मिलन ने पूछा “और क्या” आर्य सर ने कहा “भाई पौराणिक कथायें तो सभी देशों में लगभग एक जैसी ही हैं बस देवी देवताओं,राजाओं और स्थानों के नाम देश-काल के अनुसार अलग अलग हैं” “लेकिन सर, कथाओं में जो है वैसा क्या सचमुच मे घटित हुआ है?” अजय ने पूछा “भाई यही सच और झूठ में अंतर ढूंढने का काम ही तो हम पुरातत्ववेत्ताओ का है लेकिन विडम्बना है कि लोग यहाँ भी पूर्वाग्रह से काम लेते हैं” आर्य सर ने लम्बी साँस लेते हुए कहा फिर उठने का इशारा करते हुए बोले ” खैर छोड़ो इस विषय पर बाद में बात करेंगे.अब यूनान से वापस अपने देश में आ जाओ और मालवा की ताम्राश्मयुगीन सभ्यता की खोज में टीले पर चलो
हम लोग उठे और अपनी नोटबुक्स उठाकर टीले की ओर चल पड़े।
आपका -शरद कोकास

6 टिप्‍पणियां:

  1. अब आगे का किस्सा टीले पर ही सुनेंगे।
    धावकों की ऐडी की चोट को भी एकीलीस टेंडन (Achilles tendon)कहते हैं और ये बडे दुख देती है :-)

    आप मालवा पर जिस स्थान के उत्खनन की बात लिख रहे हैं वो किस काल का है। उन अवशेषों की अनुमानित आयु क्या है?

    उत्तर देंहटाएं
  2. इस पर एक किस्सा याद आया।
    हेलमेट पूरा पढाने के बाद सर ने पूछा कोई दिक्कत हो तो बताइये। रामसजीवन बोले सर बिचिया क करेक्टर लिखा देते तो बढिया रहता।
    सर का सर चकराया…ये बिचिया कौन है…
    बाद मे राज़ खुला रामसजीवन भाई चुडैल उर्फ़ बिच का करेक्टर जानना चाहते थे!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. मज़ा आ गया अशोक... जैसी हेलेनवा वैसे ई बिचिया.बहुतेई बढिया

    उत्तर देंहटाएं
  4. माफी चाहूंगा साहेब...पहले दो बार में यह खुल नहीं पाया था...अब जो खुला तो खुद को मझधार में पाया और देखा की श्रंखला चल रही है।
    फिर आएंगे...पहले अमरकंटक से शुरू करते हैं।

    ब्लाग का नाम पहले ही पसंद आ चुका है

    उत्तर देंहटाएं
  5. अब देखते हैं कि आप लोगों के ट्रेंच के अन्दर से कोई हेलेनवा तो नहीं निकली

    उत्तर देंहटाएं
  6. P.N. Subramanian जी हेलेनवा भीतर से तो नही निकली बाहर ज़रूर थी उसका ज़िक्र आगे आयेगा धैर्य रखिये

    उत्तर देंहटाएं