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| बीच में डॉ. कैलाशचन्द्र जैन पुरातत्व विभाग वि वि के विभागाध्यक्ष |
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| उत्खनन परिसर बरगद की छाँव |
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| रविन्द्र ,डॉ.वाकणकर .डॉ.आर्य , शरद व अशोक |
अगर आपने पिछली पोस्ट पढी होंगी तो यह बात अवश्य जान गये होंगे कि पढने लिखने के अलावा भी हम लोग बहुत सारा ज्ञान प्राप्त कर रहे थे । बस इसी ज्ञान को आप लोगों के साथ बाँटने का प्रयास है यह " एक पुरातत्ववेत्ता की डायरी " ।
तो शीघ्र ही प्रारम्भ करते हैं " एक पुरातत्ववेत्ता की डायरी - दसवें दिन के दूसरे भाग से आगे का किस्सा । निवेदन यह है कि यदि आपने पिछले भाग न पढें हों तो कृपया एक निगाह उस पर डाल लें , और न भी डाल सकें तो कोई बात नहीं इस शिविर में जिस दिन से शामिल हों उसी दिन से आपको आनन्द आयेगा - आपका - शरद कोकास


